Sunday, 18 September 2011

एक लोक गीत को सुनकर


राजा ने आकाश में उड़ती मैना का शिकार किया
बाँधकर घर लाए
घर वालों को पकड़ने की वजह बताई
-‘इसके पूर्व जनम का करम ही ऐसा था
कि मुझे शिकार का धर्म निभाना पड़ा |’
जबकि राजा को बौड़म बेटे के लिए
 जीती –जागती मैना की दरकार थी
घर के पिंजरे में कैद ,आज्ञाकारिणी
उड़ती मैना से उन्हें चिढ़ थी
राजा ने बेटे से कहा –ले जाओ इसे और खेलो
राजकुमार ने मैना के पंख नोच लिए
और कहा –उड़ो
पंख बिना मैना कैसे उड़ती
झल्लाकर राजकुमार ने मैना के पैर तोड़ दिए
और आदेश दिया –नाचो
मैना नाच न सकी
गुस्से से पागल हो उठा राजकुमार
मैना का गला दबाकर चीखने लगा
-गाओ ...गाओ ...गाओ
मैना निष्पन्द पड़ी थी
राजकुमार रोने लगा
कि गुस्ताख मैना ने नहीं मानी
उसकी एक भी बात
इससे अच्छी तो चाभी वाली मैना थी
राजा आए और राजकुमार को समझाने लगे
-तुमने नहीं सीखी अभी तक
स्त्री साधने की कला !
कुछ और नहीं करना था
बस दिखाते रहना था
मुक्ति का स्वप्न |

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