Wednesday, 16 November 2011

चुप रहो


चुप रहो
शोर मत करो
मुझे सोने दो
क्या हुआ जो
गुलाबी पंखुरियों में
धँस रहे हैं जहरीले नाखून
बढे हुए दांत चींथ रहे हैं
तितलियों के रंगीन पर
जलाये जा रहे हैं खर-पतवार
छटपटा रही है सुनहरी चिड़ियाँ
खूनी पंजों में
होता ही रहता है यह सब
मत जगाओ मुझे
देखने दो
राम-राज्य के स्वप्न | 

2 comments:

  1. sahi hai hakeekat me nahi to kam se kam swapn me to ram rajy ko dekh sake ham

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  2. सही है कम से कम स्वप्न में तो राम राज्य के दर्शन कर लेने दो ......सुन्दर रचना

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