Saturday, 4 February 2012

सहजन


सहजन
क्यों तुमने अचानक
वस्त्रों का त्याग कर दिया
और नागा साधु हो गए
कुछ दिन पहले तक तो
सब कुछ सहज था
तुम्हारे जन्म से पहले
हरा-भरा-पूरा हो गया था
रुण्ड-मुण्ड सूखा पेड़
माँ बनने जा रही
स्त्री के तन और मन की तरह
मौसी प्रकृति ने बुनी थी तुम्हारे लिए सफेद
फूलों वाली कुलही
और जालीदार स्वेटर
पड़ोसिन चिड़ियों ने तुम्हारे जन्म पर
सोहर गाया था
तेलिन चिड़ियों ने ठाकुर-ठाकुर का जाप किया था
नाइन हवा ने मला था उबटन और तेल
सूरज की किरणों ने
नहलाया-धुलाया था
चाँद में चरखा काटती बूढ़ी दादी
सुनाती रही रात-रात भर लोरी
सबके प्यार-दुलार से पले तुम
कितने सहज और अलग निकले
लम्बे..हरे ...छरहरे
फिर अचानक क्यों तुमने
वस्त्रों का परित्याग कर दिया
और नागा साधु हो गए ..|

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