Saturday, 9 July 2011

दुल्हन बरसात


धान के नन्हे पौधे
कमर –भर पानी में
डूबकी लगा रहे हैं
लोट -लोट जाती है
लम्बी ..छरहरी ..हरी
मूज ..
छोटे –बड़े
काले गोरे
सभी पेड़
पहन रहे हैं
साफ –सुंदर
हरे वस्त्र
हिलकोरें ले रहा है
काई से आधा हरा
आधा सफेद तालाब
झींगुर बजा रहे हैं
शहनाई
बूंदे नाच –गा रही हैं
मेढ़क चीख –चीखकर
बता रहे हैं सबको
लौट आई है
सावन भैया की बारात
लेकर दुल्हन बरसात| 







1 comment:

  1. जब चिड़िया करीब से गाती है

    बेटी याद आती है

    जब गिलहरी दौड़ लगाती है

    बेटी याद आती है

    जब हवा महुआ टपकाती है

    बेटी याद आती है
    achhi kavita , Bastar me bhi mahua falata hai jahan kee mai rahata hun , upama achhii lagi

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