Thursday, 25 August 2011

उम्र पार करती लड़कियां

उन्हें गाली सा लगता है 
उम्र पूछा जाना 
"उम्र' छू लेती है उनका निजी दुःख 
जिसकी जड़ें फैली होती हैं 
अंदर से बाहर तक 
बड़े जतन से छिपाए रखती हैं जिसे वे 
वे जानती हैं 
दुनियां में उनका अस्तित्व 
अब खतरे की सीमा पार कर रहा है 
चुकती जा रही है उपयोगिता 
वे जानती हैं 
तमाम सीमाओं की तरह 
बनाई गयी है उनके लिए
 उम्र की भी सीमा
जिसके पार होते ही 
नकार दी जायेगी उनकी सामर्थ्य 
और जीना पड़ेगा बाकी उम्र 
दया और उपेक्षा के सहारे 
उम्र उनकी दुखती रग 
जिसपर हाथ धरने वालों पर 
बरस पड़ती हैं 
अकेले में बरसती हैं खुद पर 
बार -बार देखती हैं दर्पण 
फिर हताश होकर सिमट जाती हैं 
थोड़ी सी और अपने में 
हसरत से देखती हैं 
छोटी बहनों की चढ़ती उम्र को 
और कुढ़ती हैं 
अपनी बढ़ती उम्र से 
कितनी सशंकित ,उदास डरी हुई होती हैं 
उम्र पार करती लड़कियां 
और आप आसानी से कह देते हैं 
सही उम्र नहीं बताती लड़कियां |

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