Friday, 27 July 2012

घोड़ा


कक्षा एक की नन्ही बच्ची
चौंकती है नींद में बार-बार
दुहराती है स्पेलिंग
कठिन अंग्रेजी शब्दों के
टेस्ट हो रहे हैं स्कूल में
कलपती है उसकी माँ
-‘इतनी छोटी बच्ची पर इतना दबाव !
इतना पाठ्यक्रम तो नहीं होता था
छठवीं कक्षा में भी हमारे समय
रट्टू तोता बना रहे हैं अंग्रेजी-माध्यम के स्कूल
ना खेलने का समय,ना बचपन जीने का
सारा का सारा ज्ञान धर देना चाहते हैं मानो
कच्चे घड़े से नाजुक मस्तिष्क में |’
सोचती हूँ मैं -क्या शामिल नहीं हैं वे भी
प्रतियोगी समय की इस भीड़ में
जहाँ तेज गति पर सबकी बोली है
जहाँ बच्चा घोड़ा तो बन रहा है
इन्सान नहीं |

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