Thursday, 17 December 2015

चार सौ बीस

शान्ति नाम था उसका 
मेरे साथ देखकर उसे
कई लोग अशांत हो रहे थे 
वजह दूसरे दिन खुली
जब कहा गया मुझसे
'कहाँ मिल गई आपको
वह चार सौ बीस
चूना लगा देगी'
समझ में नहीं आई उनकी बात
महीने भर से कस्बे से आई वह लड़की
रह रही थी मेरे साथ
शहर में उसे जरूरी काम था
किराए के मकान के लिए पैसा ना था
टकरा गयी थी एक दिन
एक गोष्ठी में मुझसे
और आ गयी थी घर साथ
सुबह घर में छोड़कर उसे
चली जाती थी मैं कॉलेज
लौटती तो पड़ोस में चाबी देकर
जा चुकी होती वह
अपने काम से
घर मिलता चकाचक
किचन में खाना तैयार
मेज पर एक पर्ची-'खाना जरूर खा लीजिएगा
बहुत लापरवाह हैं आप सेहत के प्रति'
अभिभूत हो जाती मैं
जीवन में पहली बार मिला था ऐसा प्यार
उम्र में छोटी थी मुझसे
रखती मगर माँ की तरह ध्यान
कभी कुछ गायब न हुआ
ना हुआ कोई नुकसान
फिर क्यों था शान्ति का चार सौ बीस नाम ?
साँवली -सलोनी लंबी -छरहरी शान्ति
पति का घर छोड़ आई थी नन्हे बच्चे के साथ
नहीं सह पाई थी घरेलू हिंसा
बच्चे को छोड़कर माँ के पास
कर रही थी एन जी ओ में काम
फिर क्यों था चार सौ बीस उसका नाम ?
पता चला बहुत बाद में
कभी किसी को पुट्ठे पर
रखने नहीं दिया था हाथ
इसलिए दिलजलों ने रख दिया था
चार सौ बीस उसका नाम |

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